Mamta Kaliya Ki Kahaniyan 3
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मेरी कहानियाँ-ममता कालिया (Hindi Sahitya)
इन दस कहानियों में मैंने अपनी प्रारंभिक कहानी ‘छुटकारा’ इसलिए दी कि उसमें कच्ची धान की बाली की गंध है। मैंने जब लिखना शुरू किया था, प्रायः उस उम्र में आजकल लेखिकाएँ नहीं लिखतीं। आजकल प्रौढ़ अवस्था में वे लिखना शुरू करती हैं, जब कलम-कलाई में चौकन्नापन आ जाता है। मेरे लिए लेखन साइकिल चलाने जैसा एडवेंचर रहा है, डगमग-डगमग चली और कई बार घुटने, हथेलियाँ छिलाकर सीधा बढ़ना सीखा। समस्त गलतियाँ अपने आप कीं, कोई गॉडफादर नहीं बनाया। बिल्ली की तरह किसी का रास्ता नहीं काटा और किसी को गिराकर अपने को नहीं उठाया। हमारे समय में लिखना, मात्र जीवन में रस का अनुसंधान था; न उसमें प्रपंच था न रणनीति। निज के और समय के सवालों से जूझने की तीव्र उत्कंठा और जीवन के प्रति नित नूतन विस्मय ही मेरी कहानियों का स्रोत रहा है। पाठक सुविख्यात लेखिका ममता कालिया की कहानियों को एक ही पुस्तक में पाकर सुखद अनुभव करेंगे।
Stri Evam Samajik Prasang Mamta Kalia Katha Sahitya
ममता कालिया हिन्दी साहित्य के पिछले पाँच दशकों की आवश्यक रचनाकार हैं, जो हम सबके जीवन के निकट रहती व लिखती आयी हैं। एक्स-रे जैसी पटु सामाजिक दृष्टि और सकारात्मक अनुभवों से भरा उनकी कृतियों का संसार फिर-फिर चर्चा की माँग करता है। उनके लेखन पर उपलब्ध शोध-ग्रन्थों में इस पुस्तक का स्थान, एक परदेसी विद्यार्थी की देन होते हुए भी स्वयं लेखिका के अनुसार "प्रमुख" है। प्रस्तुत किताब को कई स्तरों पर पढ़ा और समझा जा सकता है। मुख्यतः तो यह एक साहित्यिक अध्ययन है, पाठकों को इसके संयोजन में एक विदेशी छात्र की देशी अनुभूतियों के प्रतिबिम्ब भी दिखाई पड़ेंगे। कुछ प्रतिशत समाजशात्र के आस-पास कुछ प्रतिशत भाषा और शैली सम्बन्धी समालोचन के बिन्दुओं का सम्यक् विश्लेषण करने का प्रयत्न यहाँ हुआ है। आलोचना में मूल पाठ की अपरिहार्यता को बारम्बार रेखांकित करती यह खोज ममता कालिया की रचनाओं के सबसे मनोरम एवं मनीषी विचारों का आकलन है। लेखिका के साहित्य तथा अध्येता की जिज्ञासा दोनों के लिए हमारे समय में महिलाओं की स्थिति से जुड़े प्रश्न केन्द्रीय रहे, इसके अलावा मौजूदा शोध में प्रायः सभी दृष्टिगत सामाजिक सन्दर्भों को गूँथने की कोशिश की गयी है। ममता कालिया स्वयं एक स्त्री हैं, जो समाज के बीच में बेचैन खड़ी अपनी आँखों के सामने घट रहे हैरतंगेज़ दृश्यों का चित्रण करती चली हैं। इन्हें उनके सोसियोग्राफी सरीखे लेखन के झरोखे से देखेंगे और इस मौलिक व्याख्या के सहारे सहज रूप से समझने का प्रयास करेंगे।