धीरे-से दबे पाँव वह सीढ़ियाँ उतर गई और बाथरूम की ओर चल दी। जैसे ही उसने बत्ती जलाने को हाथ बढ़ाया वह सिहर उठी। उसकी दृष्टि द्वार के शीशों से बाग में छिपे सीमेंट की बेंच पर पड़ी। आनंद व संध्या एक-दूसरे के आलिंगन में बंधे थे। छिटकी चाँदनी में दो यौवन मदमातों को यूँ देख बेला को रोमांच हो आया और कुछ ही क्षणों में ज्वाला भड़कने लगी। आखिर दीदी को इतनी स्वतंत्रता क्यों? तो क्या दीदी आनंद से प्रेम करती हैं? और मेरा उसके साथ जाना उनकी स्वतंत्रता में बाधा थी। सबको तो शिक्षा देती हैं किंतु स्वयं तो-' और न जाने यूं ही कितने प्रश्न उसके मस्तिष्क में मंडराने लगे। किंतु प्रत्येक प्रश्न उसके हृदय-पटल पर द्वेष की एक गहरी रेखा अंकित कर गया। जैसे ही आनंद ने संध्या के होंठों को छुआ, बेला के शरीर में फुरेरी सी दौड़ गई और उसने आँखें बंद कर लीं। उसने भी अपने होंठों पर जलते अंगारे अनुभव किए। कुछ समय पश्चात् जब उसने अपनी आँखें खोलीं तो देखा कि वह दोनों बेंच छोड़कर द्वार की ओर बड़े जा रहे थे। बेला दबे पाँव अंधेरे में छिप गई।
नीलकंठ
ISBN: 8128814400
ISBN 13: 9788128814402
Publication Date: 2007
Publisher: Diamond Pocket Books (P)Ltd.
Format: Paperback
Author: Gulshan Nanda
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